कुछ बातें कहकर, कुछ गाने सुनाकर,
प्यार का इज़हार तुम भी तो किया करते थे। ये सुनो, इसमें भी इसे महसूस करो ऐसा बताया करते थे। फिर उन एहसासों को भुलकर, उन बातों को कहीं दूर छोड़ कर तुम तो आगे बढ़ जाना, मेरे लिए वो एहसास ही काफी है, कभी बिताए जो पल, वो यादें ही काफी हैं। अगर कभी मुश्किल हुआ सफर तो तेरे भेजे हुए गाने ही काफी हैं...Saturday, 7 October 2023
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एक सवाल खुद से?
इंतज़ार कर रहे हो जिसका तुम, उसके आने पर उसके नहीं हो पाओगे, तो किसकी इंतज़ार में रातें बिताओगे? जहां जाना था तुम्हें, वहां जाकर भी सुकून न...
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तो कोई क्या करे ज़िन्दगी जब अधूरी लगे कोई बात न ज...
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बेबस बचपन बात मार्च २०, 2014 की है। मैं अपनी माँ के साथ बाजार गयी हुई थी। हमे बैग भी खरीदना था। व...
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